वंदे मातरम परिचय, लिरिक्स और अर्थ - Vande Mataram Info, Lyrics Aur Arth (Anuwaad):

वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत एक बंगाली कविता का हिंदी संस्करण है जिसे बंकिम चंद्र चटर्जी जी ने 1870 में लिखा था और 1882 में उसे अपनी आनंद मठ नामक पुस्तक में जोड़ा था, इस कविता को सर्वप्रथम रविंद्र नाथ टैगोर जी के द्वारा 1896 मैं गाया गया था, उसके बाद यह कविता 1952 में बनी मूवी आनंद मठ में फिल्माया गया जिसे लता मंगेशकर जी ने गाया तथा जिसके म्यूजिक को डायरेक्ट किया था हेमंत कुमार जी ने, और लिरिक्स तो आपको पता ही है कि बंकिम चंद्र चटर्जी जी के द्वारा लिखा गया था. दोस्तों यदि वंदे मातरम के लिरिक्स में कोई कमी हो तो हमें कमेंट बॉक्स में सूचित करें धन्यवाद




 Song:                       Vande Matram
 Movie:  Anand Math (1952)
 Singer:  Lata Mangeshkar
 Lyricist:  BankimChandra Chatrji
 Music:  Hemant Kumar
 Label:  -
 Released:  -


Vande Matram Song Hindi Lyrics


वन्दे मातरम्...
वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्य श्यामलां मातरम्...
वन्दे मातरम्

शुभ्र ज्योत्स्न पुलकित यामिनीम
फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् .
सुखदां वरदां मातरम् .. 
वन्दे मातरम् ...

कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले
निसप्त कोटि भुजैध्रुत खरकरवाले
के बोले मा तुमी अबले
बहुबल धारिणीं नमामि तारिणीम्
रिपुदलवारिणीं मातरम् .. 
वन्दे मातरम् ...

तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हृदि तुमि मर्म
त्वं हि प्राणाः शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गडि मंदिरे मंदिरे .. 
वन्दे मातरम् ...

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी...
कमला कमलदल विहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलाम्
सुजलां... सुफलां मातरम् .. 
वन्दे मातरम् ...

श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्
धरणीं... भरणीं मातरम् .. 
वन्दे मातरम्
वन्दे मातरम् ...
भारत माता की जय

:समाप्त:







Vande Mataram Hindi Anuwad / Arth / Meaning


हे माँ! मैं तेरी वन्दना करता हूँ
अच्छे पानी, अच्छे फलों,
सुगन्धित, शुष्क, उत्तरी समीर (हवा)
हरे-भरे खेतों वाली मेरी माँ।
हे माँ! मैं तेरी वन्दना करता हूँ

सुन्दर चाँदनी से प्रकाशित रात वाली,
खिले हुए फूलों और घने वृ़क्षों वाली,
सुमधुर भाषा वाली,
सुख देने वाली वरदायिनी मेरी माँ।
मैं तेरी वन्दना करता हूँ

तीस करोड़ कण्ठों की जोशीली
आवाज़ें,
साठ करोड़ भुजाओं में तलवारों को
धारण किये हुए
क्या इतनी शक्ति के बाद भी,
हे माँ तू निर्बल है,
तू ही हमारी भुजाओं की शक्ति है,
मैं तेरी पद-वन्दना करता हूँ मेरी माँ।

तू ही मेरा ज्ञान, तू ही मेरा धर्म है,
तू ही मेरा अन्तर्मन, तू ही मेरा लक्ष्य,
तू ही मेरे शरीर का प्राण,
तू ही भुजाओं की शक्ति है,
मन के भीतर तेरा ही सत्य है,
तेरी ही मन मोहिनी मूर्ति
एक-एक मन्दिर में,
हे माँ! मैं तेरी वन्दना करता हूँ।

तू ही दुर्गा दश सशस्त्र भुजाओं वाली,
तू ही कमला है, कमल के फूलों की बहार,
तू ही ज्ञान गंगा है, परिपूर्ण करने वाली,
अच्छे पानी अच्छे फलों वाली मेरी माँ,
मैं तेरी वन्दना करता हूँ।
हे माँ! मैं तेरी वन्दना करता हूँ।

लहलहाते खेतों वाली, पवित्र, मोहिनी,
सुशोभित, शक्तिशालिनी, अजर-अमर
हे माँ! मैं तेरी वन्दना करता हूँ।

:समाप्त: