कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसके कर्म खुद उसी पर भारी पड़ जाते हैं और किस प्रकार वह अपना परिवार टूटने से बचाता है इस कहानी में इसी के बारे में बताया गया तो चलिए चलते हैं अभिषेक शर्मा जी के द्वारा लिखी गई इस बेहतरीन कहानी की तरफ...



 Story:                   Karma Returns
 Writter:  Abhishek Sharma
 Language:  Hindi


Karma Returns Hindi Kahani

कर्म लौट आया
अभिषेक शर्मा


कार की सीट पर सीट बेल्ट लगाए हुए पूरी तरह से चौकन्ना और एसी चालू होने के बावजूद पसीने से लतपथ, कार की स्टीयरिंग व्हील को तेजी के साथ दाएं बाएं घुमाकर, कार को नियंत्रित करने की कोशिश में लगे अमित की आंखें चौड़ी हो गईं, और तभी धड़ाम की आवाज़ के साथ गाड़ी एक पेड़ से टकरा गई, उसका सिर स्टीयरिंग व्हील से टकरा जाने से लहूलुहान था, हालांकि गाड़ी कुछ ऐसे टकराई थी कि बायीं तरफ ज्यादा नुकसान हुआ था जहाँ कोई नहीं बैठा था।

गाड़ी के दरवाजे को ज़ोरदार धक्का लगाकर अमित बाहर निकला और अपने सिर से बहते खून को सफेद रुमाल से पोंछते हुए गाड़ी के हालात पर सरसरी निगाह दौड़ा रहा था कि उसने पीछे की तरफ किसी सड़क पर किसी इंसान को पड़ा हुआ पाया। वो भागकर उसके पास पहुंचा, तो बिल्कुल घबरा गया, अमित के सामने बिल्कुल घायल व्यक्ति पड़ा था जिसके पैरों में न तो जूते थे और न ही शरीर पर ढंग के कपड़े जो कि अब खून में सने हुए थे। उसने उस आदमी की सांस देखी तो थोड़ा सा सुकून मिला कि कम से कम ज़िंदा तो है, अब अमित भागकर अपनी गाड़ी के पास पहुंचा और अपने फ़ोन की तलाश करने लगा, जो कि उसे ड्राइवर सीट के नीचे मैट पर पड़ा मिला।
फ़ोन से उसने तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अपनी स्तिथि बताई और उस व्यक्ति के बारे में भी बताने जा रहा था जो कि सड़क पर मरणासन्न पड़ा हुआ था, इससे पहले वो कुछ और बताता की उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और उसके शब्द लड़खड़ाने लगे।फ़ोन हाथ से छूटकर गिर चुका था और अमित भी ज़मीन पर लुढ़का हुआ था बिल्कुल किसी सूख चुके पत्ते की तरह।

अमित की आंख खुली, चारों तरफ सफ़ेद दीवाल वाला कमरा जिसकी खिडकियों पर नीले पर्दे पड़े हैं, अभी उसे सब धुंधला दिखाई पड़ रहा है, चारों तरफ़ अजीब सी खामोशी है इस खामोशी में उसे सिर्फ़ मशीनों की टूँ टूँ सुनाई पड़ रही है, अब धीरे धीरे सबकुछ साफ नजर आने लगा है, अमित अब अपने शरीर को महसूस कर पा रहा है पर अभी भी उसका बदन बहुत बुरी तरह से टूट रहा है उसे ऐसा लग रहा है जैसे कि 6 वी मंज़िल से फेंक दिया गया हो। दर्द की वजह से वो कराह रहा है अब उसे अपने सिर में कुछ महसूस हो रहा है जैसे कि किसी ने उसके सिर पर बड़ा पत्थर रख दिया हो, उसकी कराहना सुनकर कमरे का दरवाजा खुला है एक औरत जो कि नर्स जैसी लग रही है उसके पास आती है और उसके हाथ मे सुई चुभाती है, जिसके बाद अमित का दर्द कम होने लगता है और वो फिर से दवा के नशे में खो जाता है।

आज अमित को होश आया दर्द तो हो ही रहा है पर अब उसे कुछ ठीक महसूस हो रहा है, आज डाक्टर ने परिवार वालों को उससे मिलने की इजाज़त दे दी है।

आज न जाने कितने दिन बाद अमित अपने परिवार वालों को देख पायेगा, यही सोच रहा था कि दरवाज़ा खुला, दरवाज़े से उसकी पत्नी जिसकी आंखों में खुशी की लहर दौड़ रही थी ने प्रवेश किया, अमित को कुछ ज्यादा साफ नही दिख रहा था पर एक रेखाचित्र सा बनकर उभरता हुआ प्रतीत हो रहा था, सिर पर पल्लू किये हुए हल्की नीली साड़ी में आंखों पर चश्मा भी चढ़ा हुआ था, चश्मे को देखकर लगा कि कोई और है ,पर जब उसने थोड़ा आंखों पर ज़ोर दिया तो पहचान गया कि ये उसकी पत्नी राधिका है। अब उसके पीछे उसके बूढ़े मां बाप जो कि उसे कुछ ज्यादा ही बूढ़े दिखाई पड़ रहे थे भी अपने बेटे को देखने के लिए भीतर आ गए सबकी आंखों से अश्रुधारा बह रही थी कि तभी एक 16 साल की नवयुवती ने भी प्रवेश किया, पर वो अमित को कुछ अनजान सी मालूम पड़ रही थी, और आकर एक किनारे पर खड़ी हो गयी।

उसके पीछे से सफेद कोट मे गले में आला लटकाए तेज़ चाल में डाक्टर ने भी अपनी उपस्तिथि दर्ज करा दी। अब डॉक्टर ने सबसे पहले अमित से उसके मां बाप और पत्नी को पहचानने को कहा और उनके नाम पूछे जो कि अमित ने सही सही बता दिए, अब डॉक्टर संतुष्ट थे और परिवार वाले खुश क्योंकि अमित की याददाश्त को कुछ नहीं हुआ था, पर अब भी वो उस लड़की को नहीं पहचान पा रहा था। उसने उसके बारे में पूछने के लिए राधिका से कुछ कहने की कोशिश की पर राधिका ने उसे चुप करा दिया। उसने सोचा कि राधिका के रिश्ते में होगी जो शायद राधिका की मदद को आई हो। डॉक्टरों ने सारी जांचें करवाई और आगे 2 दिन तक अमित को हॉस्पिटल में ही रखा। इन 2 दिनों में रात में उसके साथ उसकी पत्नी राधिका अस्पताल में रुकती और दिन में उसके पिता हालांकि वो लड़की भी रोज़ राधिका के साथ आती और कुछ देर बाद चली जाती।

आज अमित की अस्पताल से छुट्टी होने वाली थी, आज वो घर जाने वाला था, आज वो दुनिया के सबसे सुखी लोगों में से एक था। सारी तैयारियां हो गयी थी अमित ने घर वाले कपड़े पहन रखे थे, वो चल फिर भी सकता था, हालांकि चाल में हल्की सी लड़खड़ाहट थी। अभी भी कई सवाल उसके दिमाग में थे, जिनके जवाब वो चाहता था, पर अभी वो खुश था। राधिका उसके पास आई उसके हाथ मे डिसचार्ज पेपर थे, जिन्हें अमित को दिखाते हुए उसने कहा कि चलें, अपने आशियाने में, और इसके बाद शब्दों की जगह खिलखिलाहट ने ले ली।

अमित को होश आने के बाद ये 7 वाँ दिन था। बाहर कैब wait कर रही थी, कैब देखकर अमित ने राधिका से कहा कि क्या महंगा अस्पताल है ना घर भी ac कार में छुड़वाता है, राधिका ने हंसते हुए बस इतना ही कहा कि नहीं ये कार हमने मंगाई है किराए पर। अभी अस्पताल से घर जाते समय रास्ते मे पड़ने वाली हर इमारत काफी ऊंची थी , उसने राधिका से पूछा कि क्या हम विदेश में हैं जो यहां इतनी खूबसूरत इमारते हैं। राधिका इसका जवाब देती इससे पहले उसका फ़ोन बजा- फ़ोन अमित के पिता जी ने किया था उनका आदेश था कि रास्ते मे पड़ने वाले किसी स्टोर से मिठाई भी लेती आये। अमित अभी भी उन गगनचुंबी इमारतों को देख रहा था। घर पहुंचा तो उनका घर भी वो नही था जहां वो कभी रहा करता था।

अब उसका मन बेचैन हो रहा था घर पहुंचते ही उसने सबसे सवाल करने शुरू कर दिए कि ये क्या है और सब कुछ इतना कैसे बदल गया, ये हम लोग कहाँ हैं? अमित ये पूछ ही रहा था कि अचानक से उसका पैर लड़खड़ाया तो राधिका ने उसे तुरंत संभाल लिया, तभी अमित की निगाह राधिका के छिपे हुए सफ़ेद बालों पर गयी हालांकि उसने डाई किया हुआ था फिर भी कुछ सफेदी झलक रही थी अमित और परेशान हो गया।

अब उसके परिवार वालों के पास दूसरा कोई चारा न था। राधिका ने उसे बताया कि वो पिछले 13 साल से कोमा में था और अभी 6 माह पहले ही उसके शरीर मे हलचल शुरू हुई है, इस समय में दुनिया तुमसे 13 साल आगे निकल चुकी है। अब ये 2023 चल रहा है जबकि अमित का एक्सीडेंट 2010 में हुआ था, अमित अब तक 2010 में ही जी रहा था। पहले तो अमित को विश्वास नहीं हुआ कि वो 13 साल तक बेहोश रहा, पर जब उसे शीशा दिखाया गया तो वो उसमे खुद को ही नहीं पहचान पाया। पर अब तक तो सब ठीक था, अमित खुद को समझाने की कोशिश कर रहा था की तभी वही लड़की सीढ़ियों से उतरते हुए नीचे आयी और आते ही राधिका से बोली कि माँ मैं अपनी दोस्त के घर जा रही हूं, और वहीं से सीधे अपने घर पहुंचूंगी। राधिका ने स्वीकृति में सिर हिलाया। और वो लड़की वहां से चली गई।

अब अमित राधिका को घूर कर देख रहा था, उसके मन में जितने सवाल थे उसने सब एक के बाद एक करके छोड़ने शुरू कर दिए। उसका पहला सवाल था कि तुम और मां, और ये अपना घर से क्या मतलब है, तुमने दूसरी शादी कर ली, ये लड़की तो हमारी शादी के साल से ज्यादा बड़ी है कैसे राधिका? उसके सवाल इस समय राधिका को कुछ ऐसे प्रतीत हो रहे थे जैसे कि अमित उसे शब्दों की चाकू से लगातार गोदता चला जा रहा हो। अब अमित को अपने इतने साल तक बिस्तर पर पड़े रहने से ज्यादा परेशानी इस बात से हो रही थी कि राधिका के पास बेटी है। कितनी जल्दी हमारी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं हम सोच भी नहीं सकते।

ज़िन्दगी ने राधिका को कितने दर्द दिए थे इस बात का अमित अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता था। इस समय उसके दिमाग में बस एक बात भरी हुई थी कि राधिका ने उसके मरने तक का इंतज़ार नहीं किया और किसी और की हो गयी। वो राधिका पर लगातार ताने कसे जा रहा था, उसके मां बाप उसे रोकने की कोशिश कर रहे पर वो उनकी एक न सुन रहा।

राधिका ने अमित से बस एक बात कही- कि मैंने सोचा था तुम सही हो जाओगे तो सब सही हो जाएगा पर तुम तो कोई और ही हो, वो अमित नहीं जिसे मैंने जाना था, और जब यहां पर मुझे कोई समझने वाला है ही नहीं तो मैं यहां क्या करूँगी? अपनी दवाइयां समय पर लेते रहना, good bye अमित।

राधिका अपने घर पहुंची जहां वो पिछले 6 माह से रह रही थी, औऱ अब इस अकेलेपन में वही राधिका जो अमित के सवालों के सामने पत्थर बनकर खड़ी थी अकेले में मोम की तरह पिघल रही थी। उधर अमित के माता पिता जो कि अमित को उसके पिछले समय की बातें बताने लगे। अमित ने जब पूरी बात सुनी तो वो अपने आपको ही कोसने लगा।

अमित को पता चला कि जब उसका एक्सीडेंट हुआ तो दुर्घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाली राधिका थी। राधिका जब वहां पहुंची तो वहां पर अमित और उस व्यक्ति के अलावा एक तीसरी नन्ही सी जान भी थी जो कि यही कोई 3 साल की रही होगी, पता नही कैसे बची पर बेहोश हो गयी थी। एम्बुलेंस में तीनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां पता चला कि वो आदमी जिसे अमित की गाड़ी से टक्कर लगी थी वो मर गया, औऱ अमित कोमा में चला गया।

पुलिस ने उस बच्ची की जानकारी जुटाई तो पता चला कि वो लड़की उसी आदमी की लड़की है और उस लड़की के परिवार में उसके पिता के अलावा कोई और नहीं था। राधिका अपने पति की गलती के लिए खुद पछतावे में घिर गई थी, इसलिए उसने पुलिस से उस बेटी को अपने साथ घर ले जाने की इजाज़त मांगी, पर क्योकि वो बच्ची उसे नहीं जानती थी तो उसकी कस्टडी नहीं मिली। अब पुलिस ने जांच में पता लगाया तो पता चला कि किसी ने अमित की गाड़ी के ब्रेक के साथ छेड़छाड़ की थी।

अधिक जानकारी जुटाने पर पता चला कि वो जो व्यक्ति टकराकर मरा था वो अपाहिज था और अपाहिज होने से पहले एक कार मैकेनिक के रूप में बड़ी कंपनी में काम करता था और एक दिन काम करते हुए गाड़ी उस पर गिर गयी, जिसके चलते वो अपाहिज हो गया, कंपनी ने उसे निकाल दिया। कंपनी ने एक काम अच्छा किया था, अपने हर कर्मचारी का insurance कराया था। insurance उसी कंपनी ने किया था जिसमे अमित काम करता था। वो आदमी पिछले 2 माह से अमित के दफ्तर के चक्कर लगा रहा था अपने पैसों के लिए और अमित उसे रोज़ टरका रहा था।

उस दिन जिस दिन ये दुर्घटना हुई अमित ने उस व्यक्ति को गाली गलौज के साथ धक्के मारकर बाहर निकलवा दिया। इसी खुन्नस में उसने अमित की गाड़ी की ब्रेक खराब कर दी। उसे क्या पता था कि वो खुद की मौत को बुलावा दे रहा है। अमित ये सब जानकर बिल्कुल सदमे में आ गया था। उसे अपनी पत्नी की ईमानदारी पर तो भरोसा हो गया था, पर अब वो जानना चाहता था कि आखिर वो अलग क्यो रहती है। उसके माता पिता ने बताया कि जब 2 से 3 माह बाद भी उस बच्ची की कस्टडी किसी ने नहीं ली तब राधिका ने उसे कानूनन गोद ले लिया।

जिसका हम सबने विरोध किया, आखिर हम उस इंसान की बच्ची को कैसे पाल सकते थे जिसने हमारे बेटे को मारने की कोशिश की थी, तब हम लोगो ने उससे हमे या उस लड़की को चुनने की शर्त रखी तो उसने अपने पति की गलती सुधारने के लिए उस लड़की का हाथ थाम लिया। वो उस लड़की को लेकर निकल गयी इस घर को तुझे और हम सब को छोड़कर। पहले तो कुछ दिन यहीं रही फिर स्पेन चली गयी और वहां पर अपनी डॉक्टरी की शुरुआत की, और ये 13 साल का समय तन्हाई रूपी अंधेरे में बस उस दीपक रूपी बच्ची के साथ काट दिए।

जब उसे पता चला कि तुममे हरकत हो रही है तो अभी 6 माह पहले आयी है और आते ही तुम्हारी देखभाल में लग गयी। बहुत कहने पर और समझाने पर उसने यहां आना जाना शुरू किया। हमने उससे अपने किए की माफी भी मांग ली। तुमने सही नहीं किया बेटा, उसे रोक लो और अपना लो।

अभी अमित की आंखों में आंसू थे, उसने अपनी माँ और पिता जी का सहारा लेकर उनके साथ राधिका के घर के लिए निकल पड़ा। वहां पहुंचकर पता चला कि वो लोग तो 1 घण्टे पहले एयरपोर्ट के लिए निकल गए। अमित बड़ी तेजी में वापस भागा की लड़खड़ा गया। उसके पिता जी ने उसे संभाला और जल्दी से कैब करके एयरपोर्ट पहुंचे। कोई पर्याप्त id न होने के कारण, वहां पर अमित को मुख्य द्वार पर ही रोक दिया गया। अमित के पिता जी भागकर अंदर गए तो उन्हें दूर से ही राधिका और उसकी बेटी दिख गए।

राधिका के पास पहुँचकर उन्होंने कहा- बेटी घर चलो अब घर के सूनेपन में नही रहना मुझे, अमित तुम्हें लेने आया है। राधिका ने मना करने के लिए सिर हिलाना चाहा पर तभी उसकी बेटी बोल पड़ी क्या पापा आये हैं चलिए न मम्मा पापा से मिलते हैं और दादू के साथ रहेंगे। हंसते हुए अमित के पिता जी ने बैग अपने हाथ मे लेते हुए राधिका को चलने का इशारा किया।

बाहर जब राधिका और उसकी बेटी आये तो अमित का सिर शर्मिंदगी से नीचे हो गया, तभी उसकी बेटी ने आकर उसे बड़े प्यार से जब पापा कहा तो अमित की आंखें छलछला उठीं, उसने आगे बढ़कर अपनी बेटी को गले लगा लिया। अब अमित के सीने में जल रही पश्चाताप की आग शांत हो रही थी, और राधिका की नाराजगी भी धूमिल पड़ गयी थी। तभी अमित ने बेटी से पूछा कि तुम्हारा नाम क्या है? उसने प्यारी सी आवाज़ में जवाब दिया - स्मिता पर माँ मुझे प्यार से खुशी बुलाती हैं। हंसी की एक लहर सी आयी और अमित ने खुशी से कहा ठीक है अब ये खुशी हम सब की खुशी है।

सीख:- दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें बेवजह किसी का वक्त बर्बाद नहीं करना चाहिए और हम जैसा करते हैं उसका फल हमें कहीं ना कहीं कभी ना कभी जरूर मिलेगा चाहे वह अच्छा हो या बुरा।